श्यामा मंदिर, दरभंगा
दरभंगा राज में श्यामा मन्दिर एकटा चिता पर बनल अछि। एहि ठाम बहुत संख्या में श्रद्धालु दर्शन करवाक लेल अबैत छैथि। महाराज रामेश्वर सिंह दरभंगा राज परिवार के साधक राजा छलाह तें एहि मन्दिर के नाम रामेश्वरी श्यामा माय के नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि ।मन्दिर केर स्थापना १९३३ ई. में महाराज कामेश्वर सिंह द्वारा कयल गेल छल ।गर्भगृह में माँ काली के विशाल प्रतिमा के दाहिना कात में महाकाल आ बामा कात में गणपति आ बटुक भैरव केर प्रतिमा स्थापित अछि। एहि ठाम माँ काली के पूजा वैदिक आ तांत्रिक दोनों विधि सँ कयल जाइत अछि ।आमतौर पर हिन्दू धर्म में नव विवाहिता एक वर्ष धरि कोनो श्मशान भूमि पर नहिं जाइत छैथि मुदा श्मशान पर बनल एहि मन्दिर में नव विवाहिता आशीर्वाद प्राप्त करय अवैत छैथि अपितु एहि मन्दिर में बिवाह सेहो आयोजित कयल जाइत अछि। एहि मन्दिर के विषय में विद्वान लोकनिमे किछु मतभेद छैन्ह, किछु विद्वान श्यामा माय के काली के अवतार मानैत छैथि तऽ किछु विद्वान केर मतानुसार श्यामा माई माता सीता के रूप में छैथि। एहि बात केर ब्याख्या राजा रामेश्वर सिंह के सेवक लाल दास अपन पुस्तक रामेश्वर चरित मिथिला रामायण में कयने छैथि जे वाल्मीकी रामायण सँ लेल गेल अछि जाहि में स्पष्ट कयल गेल अछि जे रावण बध भेलाक उपरान्त माता सीता भगवान राम सँ कहने रहथिन जे सहस्रानन्द के बध जे करत वेएह असली वीर होयत। भगबान श्रीराम ई सुनि सहस्रानन्द के पाछू दौड़ि गेल रहैथि ।मुदा युद्ध के दौरान सहस्रानन्द के एकटा तीर भगवान श्री राम के लागि गेल रहैन। ई देखितहिं माता सीता अत्यंत क्रोधित भ गेल छलीह। हुनक पूरा शरीर केर रंग कारी पड़ि गेल रहैन आ सहस्रानन्द के वध कयलाक उपरान्तो जखन हुनक क्रोध शांत नहिं भेलैन्ह त हुनका रोकवाक लेल स्वयं महादेव के सामने आवय पड़लैन्ह। महादेव के छाती पर पैएर पड़िते माता बहुत लज्जित भेलीह आ हुनकर मुंह सँ जीभ बाहर आबि गेलैन आ माता के एही रूप में एतय पूजा कयल जाइत छैन्ह। हिनका एहि ठाम काली नहिं श्यामा माई के नाम सँ जानल जाइत अछि । जय श्यामा माई 🙏🌹🌺