मिथिला का परिचय
मिथिला प्राचीन भारत में एक राज्य था। मिथिला वर्तमान में एक सांस्कृतिक क्षेत्र है जिसमे बिहार के तिरहुत, दरभंगा, मुंगेर, कोसी, पूर्णिया और भागलपुर प्रमंडल तथा झारखंड के संथाल परगना प्रमंडल के साथ साथ नेपाल के तराई क्षेत्र के कुछ भाग भी शामिल हैं। मिथिला की लोकश्रुति कई सदियों से चली आ रही है जो अपनी बौद्धिक परम्परा के लिये भारत और भारत के बाहर जानी जाती रही है। इस क्षेत्र की प्रमुख भाषा मैथिली है।
वाल्मीकी रामायण तथा विभिन्न पुराणों में मिथिला नाम का संबंध राजा निमि के पुत्र मिथि से जोड़ा गया है। वाल्मीकीय रामायण में मिथि के वंशज के मैथिल कहलाने का उल्लेख हुआ है जबकि पौराणिक ग्रंथों में मिथि के द्वारा ही मिथिला के बसाये जाने की बात स्पष्ट रूप से कही गयी है। शब्दान्तरों से यह बात अनेक ग्रंथों में कही गयी है कि स्वतः जन्म लेने के कारण उनका नाम जनक हुआ, विदेह (देह-रहित) पिता से उत्पन्न होने के कारण वे वैदेह कहलाये तथा मंथन से उत्पन्न होने के कारण उनका नाम मिथि हुआ। इस प्रकार उन्हीं के नाम से उनके द्वारा शासित प्रदेश का नाम विदेह तथा मिथिला माना गया है। महाभारत में प्रदेश का नाम ‘मिथिला’ तथा इसके शासकों को ‘विदेहवंशीय’ (विदेहाः) कहा गया है।
वृहद्विष्णुपुराण में मिथिला की सीमा (चौहद्दी) का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा गया है कि-
- कौशिकीन्तु समारभ्य गण्डकीमधिगम्यवै।
- योजनानि चतुर्विंश व्यायामः परिकीर्त्तितः॥
- गङ्गा प्रवाहमारभ्य यावद्धैमवतम्वनम् ।
- विस्तारः षोडशप्रोक्तो देशस्य कुलनन्दन॥
अर्थात् पूर्व में कोसी से आरंभ होकर पश्चिम में गंडकी तक 24 योजन तथा दक्षिण में गंगा नदी से आरंभ होकर उत्तर में हिमालय वन (तराई प्रदेश) तक 16 योजन मिथिला का विस्तार है।
महाकवि चन्दा झा ने उपर्युक्त श्लोक का ही मैथिली रूपांतरण करते हुए मिथिला की सीमा बताते हुए लिखा है कि
- गंगा बहथि जनिक दक्षिण दिशि पूब कौशिकी धारा।
- पश्चिम बहथि गंडकी उत्तर हिमवत वन विस्तारा॥
इस प्रकार उल्लिखित सीमा के अंतर्गत वर्तमान में नेपाल के तराई प्रदेश के साथ बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सितारमढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, और खगड़िया जिले का पूरा भूभाग और भागलपुर जिले का हिस्सा भूभाग आता है।
कामेश्वरसिंह-दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
कामेश्वरसिंह-दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय बिहार का एक विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 26 जनवरी 1961 को हुई। इस विश्वविद्यालय की स्थापना दरभंगा के महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की ग्रेट दानशीलता के कारण दरभंगा में हुई। इसलिए इस विश्वविद्यालय के साथ कामेश्वरसिंह-दरभंगा का नाम भी उनके सम्मान में जुटा है।
यह विश्वविद्यालय भारतीय विश्वविद्यालय संघ का एक सदस्य और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है। यह बिहार राज्य का प्रथम और भारत का दूसरा संस्कृत विश्वविद्यालय है।
इस विश्वविद्यालय के मुख्यालय में (आचार्य) के सिद्धांत के साथ-साथ संस्कृत के व्याकरण आदि शास्त्रों में खोज की भी व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय मुख्यालय में शिक्षाशास्त्र (बी.एड.) के अध्ययन की भी व्यवस्था है।
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| कामेश्वरसिंह-दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
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| ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय |

