कब कौनसा पाग पहनना चाहिए?
मिथिला में पाग धारण करने की एक निश्चित परम्परा और विधान है। कौन किस रङ्ग का पाग धारण करेगा इसकी भी व्यवस्था है।
लाल रङ्ग का पाग सिर्फ वर और बरुआ के लिए है। अन्य कोई लाल/गुलाबी रङ्ग का पाग धारण नहीं करेगा।
कोकटी जिसे बादामी रङ्ग भी कहते हैं यह घर परिवार समाज और संबंध के श्रेष्ठ व्यक्तियों के लिए है। इस रङ्ग का पाग वर और बरुआ छोड़ कर सभी के लिए है।
उजले रङ्ग का पाग अति श्रेष्ठ, विद्वान महामहोपाध्याय कोटि के व्यक्तियों के सर को सुशोभित करता है। परंतु अब उजले रङ्ग का पाग देखने को नहीं मिलता है। पुराने जमाने की तस्वीर में विद्वानों के सर पर श्वेत रंग का पाग देखने को मिलता है।
अब न कोई सुचिता रह गयी है, न किसी को पाग कोड की जानकारी है न ही समझने और उसे पालन करने में रुचि।
सार्वजनिक और शुभ अवसरों पर अधिकांश लोग लाल रंग का पाग पहनते हैं। अब पेंटिंगयुक्त पाग का चलन हो गया है। पहले पाग कोढिला से बने होते थे। अब कागज के गत्ते और कूट से बनाया जाता है जो सर पर टिकता ही नहीं है। अब तो महिलाओं को भी पाग देकर सम्मानित किया जाता है जबकि महिलाओं के लिए पाग नहीं है।
आधुनिकता बढ़ रही है परंपरा फैशन और मूर्खता की भेंट चढ़ रही है। जिसके जो मन आता है वही करता है।
धन्यवाद
काली शंकर झा जी के वॉल से